चले चल

ऐ मुसाफ़िर चले चल,

साँसों को बहने दे लम्हों पर,

ऐ मुसाफ़िर चले चल,

मंज़िल का तुझे अब क्या डर।

- तरुण





छाप क्या

क्या कलम दवात क्या क्या है बात इत्तिफ़ाक़ क्या गहना है अगर जन—धन और लिबास बदन तो मन की आयिने पर छाप क्या। त